मेरी माँ

मेरी माँ

मेरे अंधेरे रास्तों का वो उजाला है….
तपती धूप की वो शीतल छाया है…
कुछ ना कहो फिर भी ना जाने क्यों..
समझ जाती हैं वो सब कुछ यूं…
मेरी माँ की बातें मै, क्या कहूँ…
मेरी जीवन की हैं, वो अनमोल फूल।
मेरे नन्हे – नन्हे कदमो को उन्होने था संभाला…
मेरे छोटे छोटे ऊंगीलियो को, पेंसिल पकड़ना था सिखाया…
मै जो हूँ आज…
मुझे इस काबिल आप ने ही तो है बनाया।
जीवन के उतार चढ़ाव से लेकर
साड़ी के पल्लू को भी बनाना तुमने सिखाया है माँ…
मेरी गुरु भी तुम, मेरी दोस्त भी…
जिंदगी भी तुम… जीवन देने वाली भी तुम…
मेरी माँ,
मेरी शान हो तुम…. अभिमान हो तुम..!!

– पूजा जायसवाल
(Pooja Jaiswal)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: